भारतीय बडे नाेट चलाने के लिए नेपाल ने आरबीआइ से विदेश मुद्रा विनिमय कानून (फेमा) के तहत अधिसूचना जारी करने के लिए कहा

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7 january जनकपुर ,
नेपाल ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) से 100 रुपये से ऊपर के नोटों को देश में वैध घोषित करने का अनुरोध किया है। द नेपाल राष्ट्र बैंक ने इस संबंध में आरबीआइ को शुक्रवार को पत्र लिखा है। इसमें 200, 500 और 2000 के नोटों को नेपाल में कानूनी चलन में लाने के लिए आरबीआइ से विदेश मुद्रा विनिमय कानून (फेमा) के तहत अधिसूचना जारी करने का आग्रह किया गया है।

फिलहाल नेपाल में 100 रुपये और उससे कम के भारतीय नोटों के चलन की अनुमति ही है। नवंबर 2016 में 500 और 1,000 के नोटों के बंद होने से पहले तक नेपाल के लोग 100 रुपये से बड़े नोट रख सकते थे। हालांकि, इसके लिए 25 हजार रुपये सीमा तय थी। नोटबंदी के बाद आरबीआइ ने 200, 500 और 2000 के नए नोट तो जारी किए, लेकिन नेपाल में यह नोट चलन में आ सकें, इसके लिए कोई अधिसूचना जारी नहीं की। इसके चलते पड़ोसी देश में इनका उपयोग अवैध हो गया था।

एनआरबी में विदेशी मुद्रा प्रबंधन विभाग के प्रमुख ने कहा कि चूंकि आरबीआइ उच्च मूल्य वर्ग के भारतीय नोटों के प्रचलन को अनुमति नहीं दे रहा था, इसलिए नेपाल में इनके प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि तमाम लोगों का अक्सर भारत आना-जाना होता है, इसलिए हमने रिजर्व बैंक से नेपाल में ऐसे बैंक नोटों को कानूनी चलन में लाने का अनुरोध किया है।

नेपाल में इस तरह के नोटों का प्रसार आरबीआइ और भारत सरकार की इच्छा पर निर्भर करेगा। नेपाल ने इसी पत्र में भारत से अपील की है कि 1000 और 500 रुपये के प्रतिबंधित नोटों को बदलने के लिए भी दिशानिर्देश जारी करे।

नेपाल के पास 4.80 करोड़ रुपये मूल्य के हैं प्रतिबंधित नोट
नेपाल राष्ट्र बैंक ने बताया कि प्रतिबंधित 500 और 1,000 रुपये के नोटों की कुल पूंजी की बात करें तो यह लगभग चार करोड़ अस्सी लाख बैठती है। इसमें देश के सभी बैंक, वित्तीय संस्थान और केंद्रीय बैंक शामिल हैं। हालांकि यह संख्या इससे कहीं ज्यादा भी हो सकती है, क्योंकि सीमावर्ती इलाकों के लोग अक्सर भारतीय बाजारों में सामान खरीदने जाते रहते हैं। खास बात यह है कि नेपाल ने उन लोगों का डाटाबेस तैयार कर रखा है, जिनके पास प्रतिबंधित 500 और 1,000 रुपये के भारतीय नोट हैं।