DR ck raut देश दहसत गर्द नहि देश निर्माता है,अबदुल खान?

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30 dec 2018,

देश कि सरहद मे रहने वाले हर नागरिक कि जिम्मेवारी अपने वतन कि हिफाजत हाेती है।देश के “ला” अाैर “अाडर” काे मेन्टीनेन्श रखना,कहा जाता है ,नेशन इज फष्ट। पर देश कि जिम्मेवारी अपने जन्ता पर यिस्से कही बडकर हाेती है,अपने सिमा मे रहरहे लाेगाे कि सुरक्षा कर्ना,समान ब्यवहार करना,जात,धर्म,लिगं अाैर उंच निचका दुष्भाव नहाेना,समान न्याय कि अनुभुती कर्ना अर्थात राज धर्म का पालन करना अगर लाेगाे मे असमान्ता हाे ताे देश कि सिमाएं बदल सक्ती हैं,

लकिरे खिचीं जा सक्ती है।सन १९४५ मे संयूक्त राष्ट्र संघ मे ५१ देश सदस्य थे पर २०११ तक मे १९३ देश सदस्य बन चुके हैं,अाज भी नयें देश प्रति वर्ष एक से अधिक है,सन १९९० के वाद तकरिवन ३५ नऐं देश बने है,अभि ४४ देश नऐ बन्ने के सदस्य अनरिपरेजेन्ट नेशन एण्ड पिपुलस अर्गानाईजेशन के मेम्बर हैं।

नेपाल से मधेश अलग हाेने के लिए सुचि कृत हाेचुका है। जन्ता के लिए फ्रिडम अफ ऐक्स प्रेशन फन्डा मेन्टल राईटस के रुप मे है। विना हाथ हथियार के अपनि विचाराे काे जन समक्ष रखने का माैलिक अधिकार हर लाेकतान्त्रीक देश मे पाया जाता है।

पर नेपाल मे मधेशयाें पर बन्दिस क्याे? क्या नेपाल सही माइने मे लाेक्तन्त्र कायम नही किया है या मधेशयाें के लिए भेदभाव है? डा. सि के राउत ने शान्तिपूर्ण तरिके से मधेशी जन्ता के सामने मधेश स्वराज कि अभिब्यक्ती ईजहार करते है ताे उनहे वार वार गिरफ्तार क्याें किया जाता है?

अभि ताे विना बाेले अदालत कम्पाउण्ड भितर से गिरफ्तार कर जेल डाल दिया गया है।नेपाल के अदालत के सामने उन के खिलाफ काेई ठाेस सबुत न मिलने पर पुर्पक्ष के नाम पर जेल भेजा गया है,नेपाल सरकार उनहे दहसत गर्द अाैर अातंकी का दर्जा दे रहा है,पर वहीं पर हथियाराे से लैस संगठनाे से वारता हेतु कमिशन खडा किया जाता है। क्या यही समान्ता है?

यही न्याय है? यही लाेकतन्त्र है? वैसे हर काल खण्ड मे शासकाे ने जन चाहना के अनुरुप अावाज उठाने वालाे काे अातकीं अाैर दहसद गर्द के नाम से दाेषी करार देते है।वेजा किसी काे सताना,दहसत फैलाना अातंकी हाेता है पर यहां पर सही मार्गीकाे गलत चित्रण किया जाता है।डा. राउत यदी अातंकी हाेताे ताे मधेशयाें के यितने प्यारे अाैर न्यारे कैसे हाेते,अाज लाखाैं लाख उनके अनुयायी है,विदेशाे मे भी डा. राउत कि चर्चाए हाेती हैं।

अातंकी ताे सरकार है निहत्थाे पर गाेलियां चलाता है,वेवजह लाेगाे काे हवालात मे बन्द किया जाता है,न्याय मागतें मागतें लाेगाे कि अर्थी उठजाती है पर अदालत कि तारिख कि फाईल बन्द नही हाेती।भारतिय स्वतन्त्रता अान्दोलन मे भगत सपहं,उधम सिहं,राम प्रसाद विस्मल,अस्फाकुल्ला खानं, सभिकाे अातंकी करार दे कर ही सजा दी गई थी,चन्द्रहेखर अाजाद काे भी दहसत गर्द कहकर गाेली मारी थी,महत्मा गान्धी काे भी अातंकी कहकर सजा दिया गया था,उसी प्रकार अाज डा. राउत अाैर उनके अनुयायीयाें काे भी कहा जाता है। पर अाजादी अभियन्ता देश भक्त,वतन प्रेमी हाेते हैं।अत: डा. राउत अातंकी नही देश निर्माता हैं। अब्दुल खानं,प्रवक्ता,स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन ।